हरियाणा के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल औद्योगिक शहर फरीदाबाद में सर्दियों की आहट के साथ ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में गिरावट का दौर शुरू हो गया है। गिरते वायु स्तर को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिले में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण (ग्रैप-1) तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस फैसले के बाद फरीदाबाद में चल रही तमाम विकास व निर्माण गतिविधियों पर प्रशासनिक शिकंजा कस गया है।
ठंड के मौसम की शुरुआत यानी अक्टूबर के उत्तरार्ध में हवा की गति धीमी पड़ने और तापमान में गिरावट के कारण हवा में प्रदूषण के सूक्ष्म कण जमा होने लगते हैं। फरीदाबाद में जारी बुनियादी ढांचागत विकास परियोजनाओं और निजी निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल हवा में घुलकर आम जनमानस के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। इसी के मद्देनजर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कमर कस ली है और शहर भर में नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ निगरानी अभियान तेज कर दिया है।
फरीदाबाद में ग्रैप-1 लागू होने के मुख्य कारण और स्थिति
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में जैसे-जैसे एनसीआर के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, वैसे-वैसे हवा की गुणवत्ता चिंताजनक श्रेणी की ओर बढ़ रही है। फरीदाबाद में बुधवार को रिकॉर्ड किए गए आंकड़ों के मुताबिक वायु प्रदूषण में पीएम-10 का स्तर 157 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया। हवा में पीएम-10 का यह बढ़ा हुआ स्तर मानव श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक माना जाता है, जिसका मुख्य कारण सड़कों व निर्माण स्थलों से उठने वाले धूल के कण हैं।
ग्रैप-1 की नियमावली लागू होने के साथ ही फरीदाबाद प्रशासन ने खुले में निर्माण सामग्री रखने, बिना ढके मलबा ढोने और बिना जल छिड़काव के तोड़फोड़ या खुदाई कार्य करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में निरंतर पानी का छिड़काव सुनिश्चित करें ताकि धूल के कण हवा में उड़ने के बजाय जमीन पर ही बैठ जाएं।
| मापदंड / विषय | वर्तमान स्थिति एवं विवरण |
|---|---|
| प्रभावित क्षेत्र | फरीदाबाद जिला एवं आसपास का एनसीआर क्षेत्र |
| लागू नियम | ग्रैप-1 (Graded Response Action Plan Stage-1) |
| पीएम-10 स्तर | 157 माइक्रोग्राम / घन मीटर (बुधवार का दर्ज आंकड़ा) |
| प्रशासनिक निकाय | हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व नगर निगम फरीदाबाद |
| धूल नियंत्रण उपाय | पानी का छिड़काव, 4 एंटी-स्मॉग गन एवं ग्रीन नेट कवरिंग |
प्रदूषण बोर्ड की सख्त हिदायत और एंटी-स्मॉग गन की तैनाती
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय टीमों ने फरीदाबाद के विभिन्न औद्योगिक व आवासीय इलाकों में चल रहे निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण शुरू कर दिया है। बोर्ड के अधिकारियों द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी ठेकेदार या विकास एजेंसी पर्यावरण मानकों की अवहेलना न करे। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर भारी-भरकम जुर्माना लगाने तथा काम बंद कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।
"सूचीबद्ध की गई सभी निर्माण इकाइयों और ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस व दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ग्रैप-1 के तहत तय किए गए सभी सुरक्षा प्रबंधों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। निर्माण स्थलों पर रखी सामग्री को ढंकना और पानी का नियमित छिड़काव करना अनिवार्य है ताकि हवा की गुणवत्ता नियंत्रित रह सके।"
- हरीश कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (फरीदाबाद)
दूसरी ओर, फरीदाबाद नगर निगम ने भी वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए धरातल पर काम शुरू कर दिया है। शहर के मुख्य चौराहों, जीटी रोड के हिस्सों और अत्यधिक यातायात वाले मार्गों पर नगर निगम द्वारा चार बड़ी एंटी-स्मॉग गन के माध्यम से पानी की बौछारें की जा रही हैं। यह प्रक्रिया हवा में तैर रहे धूल और धुएं के कणों को भारी करके नीचे गिराने में बेहद कारगर साबित होती है।
निर्माण क्षेत्र, विकास परियोजनाओं और आम जनता पर असर
ग्रैप-1 की पाबंदियों के कारण फरीदाबाद में चल रहे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स, फ्लाइओवर निर्माण, सीवरेज लाइन बिछाने के कार्यों और निजी बहुमंजिला इमारतों के निर्माण की गति पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। ठेकेदारों को अब कार्य जारी रखने के लिए अतिरिक्त श्रम और संसाधनों का उपयोग करके पर्यावरण सुरक्षा उपाय अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे परियोजनाओं की लागत और समय-सीमा प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय निवासियों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए बढ़ता वायु प्रदूषण सांस की तकलीफें पैदा कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी सलाह दी है कि सुबह और शाम के समय जब हवा भारी होती है, तब लोग बाहर निकलने से बचें या मास्क का प्रयोग करें। ग्रैप-1 की समय पर हुई इस सख्ती से शहरवासियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में एक्यूआई बेहद खराब या गंभीर श्रेणी में जाने से बच सकेगा।
आगामी प्रशासनिक कदम और कड़े नियमन की तैयारी
यदि आने वाले दिनों में हवा का स्तर और अधिक बिगड़ता है, तो ग्रैप के अगले चरणों (ग्रैप-2 या ग्रैप-3) को भी लागू किया जा सकता है, जिसमें जनरेटर सेटों के प्रयोग और चुनिंदा निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक शामिल होती है। फिलहाल, फरीदाबाद जिला प्रशासन और हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्राथमिकता ग्रैप-1 के प्रावधानों को 100% धरातल पर लागू कराकर वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसके लिए गठित विशेष उड़नदस्ते दिन-रात निगरानी रख रहे हैं।




