हरियाणा राज्य में बिजली वितरण निगम ने उन उपभोक्ताओं के खिलाफ अपनी कार्रवाई का दायरा बेहद कड़ा कर दिया है, जो लंबे समय से अपने बिजली बिलों का भुगतान नहीं कर रहे हैं। राज्यभर में वित्तीय अनुशासन को बनाए रखने और राजस्व घाटे को पाटने के उद्देश्य से आगामी 1 नवंबर से एक व्यापक और विशेष महाअभियान की शुरुआत की जा रही है। इस अभियान के तहत उन सभी व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए जाएंगे, जिनकी तरफ बिजली बिलों की लंबी राशि बकाया है। निगम के इस सख्त कदम से उन लोगों में हड़कंप मच गया है जो वर्षों से बिना बिल भरे बिजली का उपभोग कर रहे थे।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस कड़ी में जींद जिला पूरे हरियाणा प्रदेश में बिजली बिल डिफाल्टरों की फेरद में सबसे ऊपर यानी पहले पायदान पर दर्ज किया गया है। स्थिति यह है कि अकेले जींद सर्कल के भीतर ही 35 हजार से अधिक ऐसे विद्युत कनेक्शन हैं, जिन पर 800 करोड़ रुपये से भी अधिक का बकाया शुल्क अटका हुआ है। इसके अतिरिक्त, लगभग 700 करोड़ रुपये की ऐसी भारी-भरकम राशि भी शामिल है, जो उन उपभोक्ताओं की तरफ बकाया है जिनके कनेक्शन पहले ही भुगतान न होने के कारण काटे जा चुके हैं। इस गंभीर वित्तीय संकट से निपटने के लिए अब प्रशासनिक स्तर पर फील्ड में उतरकर ताबड़तोड़ कार्रवाई की योजना तैयार की गई है।
ग्रामीण इलाकों में डिफाल्टरों की संख्या अधिक और लाइन लॉस की गंभीर समस्या
विश्लेषण करने पर यह बात सामने आई है कि बिजली बिलों का भुगतान न करने वाले ये डिफाल्टर उपभोक्ता शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण अंचलों में बहुतायत में पाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश लोग लंबे समय से बिजली के बिलों से मुंह मोड़ते आए हैं। इतना ही नहीं, जब इनके वैध कनेक्शन काट दिए जाते हैं, तब भी ये बाज नहीं आते और सीधे तौर पर कुंडी कनेक्शन या अवैध माध्यमों से अपने घरों में बिजली की आपूर्ति का इस्तेमाल करते हैं। गर्मियों के सीजन के दौरान एयर कंडीशनर (एसी) और सर्दियों के मौसम में हीटर व हीटिंग रॉड जैसी भारी बिजली खपत करने वाले उपकरण धड़ल्ले से चलाए जाते हैं।
इस प्रकार की अनधिकृत बिजली चोरी और अनाधिकृत दोहन की वजह से बिजली निगम को भारी मात्रा में लाइन लॉस (Line Loss) का सामना करना पड़ता है। अत्यधिक लाइन लॉस के कारण ही जींद सर्कल के लगभग 295 गांवों में से मात्र 39 गांव ही ऐसे हैं जहाँ 'जगमग योजना' के तहत शहरों की तर्ज पर चौबीस घंटे बिजली मिल पा रही है, जबकि हरियाणा के कई अन्य जिलों में लगभग शत-प्रतिशत गांवों को यह सुविधा मिल चुकी है। निगम का मुख्य उद्देश्य अब इसी लाइन लॉस को न्यूनतम स्तर पर लाना और राजस्व की शत-प्रतिशत रिकवरी सुनिश्चित करना है।
| अभियान का विवरण | स्थिति व आंकड़े |
|---|---|
| अभियान की शुरुआत तिथि | 1 नवंबर से संपूर्ण प्रदेश में लागू |
| शीर्ष डिफाल्टर जिला | जींद जिला (प्रदेश में प्रथम स्थान) |
| दैनिक कार्रवाई लक्ष्य | प्रत्येक सब डिवीजन द्वारा प्रतिदिन 50 कनेक्शन काटना |
| जींद सर्कल बकाया राशि | 35 हजार से अधिक कनेक्शनों पर 800 करोड़ रुपये से ज्यादा |
अधिकारियों द्वारा विशेष टीमों का गठन और प्रशासनिक रणनीति
इस मेगा रिकवरी अभियान को धरातल पर पूरी सख्ती के साथ लागू करने के लिए बिजली निगम के उच्चाधिकारियों ने कमर कस ली है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के जींद सर्कल के अधीक्षक अभियंता (SE) विनोद पूनिया ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया है कि बकायेदारों से वसूली के लिए जमीनी स्तर पर विशेष टीमों का गठन कर दिया गया है। ये टीमें सीधे तौर पर फील्ड में उतरकर बकायेदारों को चिह्नित कर चुकी हैं और उनके खिलाफ बिना किसी नरमी के नियमानुसार कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई को अंजाम देंगी।
निगम की ओर से तय किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, हर एक सब डिवीजन के अंतर्गत प्रतिदिन कम से कम 50 डिफाल्टर उपभोक्ताओं के या तो मौके पर बिल जमा करवाए जाएंगे या फिर उनके कनेक्शन तुरंत प्रभाव से काट दिए जाएंगे। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए समय रहते अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान कर दें, अन्यथा उन्हें कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
"हम बकाया बिजली बिलों की रिकवरी के लिए एक नवंबर से विशेष अभियान शुरू कर रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं पर बिल बकाया ज्यादा है, उनको चिह्नित किया गया है और इसके लिए विशेष टीमों का गठन भी कर दिया गया है। प्रत्येक सब डिवीजन को प्रतिदिन 50 कनेक्शन काटने का लक्ष्य सौंपा गया है। जिन उपभोक्ताओं का बिजली बिल बकाया है, वे समय रहते अपना बकाया बिल जमा करवा दें, ताकि कनेक्शन कटने के कारण होने वाली भारी असुविधा से बचा जा सके।" - विनोद पूनिया, अधीक्षक अभियंता (SE), दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, जींद सर्कल
नागरिकों और बिजली व्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव
बिजली निगम के इस कठोर और सुनियोजित अभियान से पूरे राज्य के ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं में यह संदेश साफ पहुंच गया है कि अब बिजली चोरी और बिल अदायगी में कोताही किसी भी कीमत पर सहन नहीं की जाएगी। जो उपभोक्ता ईमानदारी से अपने बिल भरते हैं, उन्हें अक्सर डिफाल्टरों की वजह से होने वाले फॉल्ट और ट्रिपिंग जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता था। इस मुहिम के चलने से न केवल बिजली वितरण प्रणाली में सुधार आएगा, बल्कि अवैध रूप से ऊर्जा का उपभोग करने वालों पर लगाम लगने से ईमानदार उपभोक्ताओं को भी निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति का लाभ मिल सकेगा।




