हरियाणा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तकनीक-समृद्ध और प्रामाणिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार अब प्रदेश के सभी एलोपैथिक डॉक्टर, दंत चिकित्सक, आयुष डॉक्टर, नर्सें (एएनएम, जीएनएम, बीएससी व एमएससी), फार्मासिस्ट और अन्य पात्र स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए 'हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री' (HPR) आईडी अनिवार्य कर दी गई है। यह व्यवस्था आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत प्रभावी रूप से लागू की जा रही है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य राज्यभर के स्वास्थ्यकर्मियों का एक प्रामाणिक और केंद्रीयकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है।
स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, राज्य में कार्यरत किसी भी चिकित्सा पेशेवर को अब नए पंजीकरण या पुराने पंजीकरण के नवीनीकरण (Renewal) के समय अपनी एचपीआर आईडी जमा करानी होगी। यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी के पास आवेदन के समय यह डिजिटल आईडी उपलब्ध नहीं है, तो उसे एक निश्चित समय-सीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। समय पर डिजिटल सत्यापन न कराने वाले पेशेवरों का अस्थायी पंजीकरण निलंबित कर दिया जाएगा, जिसके बाद वे प्रदेश में मरीजों का इलाज या चिकित्सकीय अभ्यास (Practice) नहीं कर सकेंगे।
एचपीआर डिजिटल आईडी नियम: मुख्य प्रावधान और समय-सीमा
नए नियमों के तहत यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी के पास पंजीकरण आवेदन के समय एचपीआर आईडी नहीं है, तो वह आवश्यक प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ संबंधित राज्य परिषद (मेडिकल, नर्सिंग या फार्मेसी काउंसिल) में ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित काउंसिल आवेदक को अधिकतम 90 दिनों की अवधि के लिए प्रोविजनल (अस्थायी) रजिस्ट्रेशन जारी करेगी। इस 90 दिनों की अवधि के दौरान संबंधित पेशेवर को एचपीआर पोर्टल पर जाकर अपनी डिजिटल पहचान आईडी जनरेट करनी होगी।
| श्रेणी / चरण | प्रक्रिया / नियम | समय-सीमा | प्रभाव / परिणाम |
|---|---|---|---|
| पात्र स्वास्थ्यकर्मी | डॉक्टर, दंत चिकित्सक, आयुष, नर्सें (ANM/GNM/BSc), फार्मासिस्ट | तत्काल लागू | एचपीआर पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य |
| अस्थायी पंजीकरण | बिना HPR आईडी के ऑनलाइन आवेदन करने पर प्रोविजनल मंजूरी | अधिकतम 90 दिन | 90 दिन तक मरीज देखने की अनुमति |
| निलंबन कार्रवाई | 90 दिनों के भीतर डिजिटल आईडी न बनवाने पर | 90वें दिन के बाद | चिकित्सकीय अभ्यास पर पूर्ण रोक |
| पुनर्बहाली प्रक्रिया | आईडी बनने के बाद काउंसिल में बहाली हेतु आवेदन | 10 दिन के भीतर | सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बाद प्रैक्टिस चालू |
| विशेष छूट प्रावधान | अधिसूचना जारी होने के 30 दिन के भीतर जिनका नवीनीकरण देय है | 30 दिन अतिरिक्त | दस्तावेज पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय |
स्मरण पत्र (Reminder System) और काउंसिल सत्यापन प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पेशेवर समय-सीमा से न चुके, एक स्वचालित अलर्ट प्रणाली तैयार की है। 90 दिनों की प्रोविजनल अवधि के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों के पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर तीन अलग-अलग चरणों में रिमाइंडर संदेश भेजे जाएंगे। पहला संदेश आवेदन के पहले 30 दिनों के भीतर, दूसरा संदेश 30 से 60 दिनों के बीच और तीसरा व अंतिम चेतावनी संदेश 75वें दिन के आसपास प्रेषित किया जाएगा।
"आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत स्वास्थ्यकर्मियों की एचपीआर आईडी अनिवार्य करने का उद्देश्य राज्य में फर्जी चिकित्सकों पर अंकुश लगाना और योग्य डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ का सत्यनिष्ठ डिजिटल रिकॉर्ड कायम करना है। नियम का पालन न करने पर 90 दिन बाद प्रैक्टिस निलंबित रहेगी।" - स्वास्थ्य विभाग अधिसूचना
प्रैक्टिस बहाली और डिजिटल डेटाबेस के दूरगामी प्रभाव
यदि कोई स्वास्थ्यकर्मी निर्धारित 90 दिनों की अवधि में आईडी बनवाने में विफल रहता है, तो उसका प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन खुद-ब-खुद निलंबित हो जाएगा। निलंबन के बाद मरीज का इलाज करना गैर-कानूनी माना जाएगा। निलंबन हटने की प्रक्रिया के तहत, स्वास्थ्यकर्मी को अपनी एचपीआर आईडी प्राप्त होने के 10 दिनों के अंदर संबंधित परिषद के समक्ष बहाली हेतु आवेदन प्रस्तुत करना होगा। काउंसिल की जांच प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी की अंतिम मंजूरी के पश्चात ही उसे दोबारा प्रैक्टिस की वैधानिक अनुमति दी जाएगी।
इसके साथ ही, जिन पेशेवरों का रजिस्ट्रेशन या नवीनीकरण आदेश जारी होने की तिथि के 30 दिनों के भीतर पूरा होना है, उन्हें प्रक्रिया सुगम बनाने के उद्देश्य से 30 दिनों की विशेष छूट और अतिरिक्त समय प्रदान किया गया है। इस डिजिटल पहल से न केवल फर्जी सर्टिफिकेट और अनधिकृत चिकित्सा पद्धतियों पर लगाम लगेगी, बल्कि नागरिकों को भी प्रमाणित और योग्य डॉक्टरों से इलाज कराने का भरोसा मिलेगा।




