हरियाणा (पानीपत लाइव ब्यूरो): प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'सीएम विंडो' के माध्यम से आमजन की शिकायतों का समाधान करने में कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अब प्रशासनिक हंटर चलना शुरू हो गया है। जींद की जिला उपायुक्त (DC) डॉ. वैशाली शर्मा ने सोमवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ (Show-Cause) नोटिस थमा दिए हैं। यह कार्रवाई उन अधिकारियों पर की गई है जिन्होंने सीएम विंडो पर प्राप्त जन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और उनके निवारण में अनावश्यक देरी या लापरवाही बरती।
डीसी डॉ. वैशाली शर्मा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का निपटारा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सोमवार को जिला सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह पाया गया कि कई विभागों में शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं या उनका समाधान संतोषजनक नहीं है। इसी को आधार बनाकर डीसी ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
इन विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिरी गाज
प्रशासनिक जांच में पाया गया कि कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारियों ने शिकायतों के निवारण की समय सीमा का उल्लंघन किया है। डीसी द्वारा जारी किए गए नोटिसों की सूची में ग्रामीण विकास से लेकर बैंकिंग और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के अधिकारी शामिल हैं।
| विभाग/पद | स्थान/क्षेत्र | कार्रवाई का कारण |
|---|---|---|
| कार्यकारी अभियंता (XEN) | दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, जींद | शिकायतों में लापरवाही |
| बीडीपीओ (BDPO) | नरवाना एवं जुलाना | कार्य में संतोषजनक प्रगति नहीं |
| जीएम टेलीकॉम (BSNL) | जींद | लंबित शिकायतों का अंबार |
| सचिव, नगर पालिका | उचाना | निर्धारित समय सीमा की अनदेखी |
| शाखा प्रबंधक (Manager) | भारतीय स्टेट बैंक (SBI) | प्रशासनिक निर्देशों की अवहेलना |
| जिला कोऑर्डिनेटर | आधार कार्ड विभाग | निवारण में देरी |
| जीएम (GM) | हैफेड (HAFED) | प्रभावी कार्रवाई का अभाव |
| कार्यकारी अभियंता (XEN) | लोक निर्माण विभाग (PWD) | अपूर्ण समाधान रिपोर्ट |
गुणवत्तापूर्ण समाधान और एटीआर (ATR) पर डीसी का कड़ा रुख
डीसी डॉ. वैशाली शर्मा ने बैठक के दौरान कड़े शब्दों में निर्देश दिए कि केवल पोर्टल पर शिकायत को 'डिस्पोज' (निपटाया हुआ) दिखा देना ही काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि अधिकारी खानापूर्ति के लिए शिकायत को बंद कर देते हैं, जबकि धरातल पर समस्या वैसी ही बनी रहती है। उन्होंने आदेश दिया कि हर शिकायत के समाधान के बाद उसकी विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) पोर्टल पर अपलोड की जानी चाहिए।
"सीएम विंडो आम नागरिकों और सरकार के बीच संवाद का सबसे पारदर्शी माध्यम है। प्रत्येक नागरिक को अपनी समस्या दर्ज कराने का अधिकार है और अधिकारियों का यह नैतिक व प्रशासनिक दायित्व है कि वे गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करें। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।" - डॉ. वैशाली शर्मा, उपायुक्त, जींद।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा की जा रही है सीधी निगरानी
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सीएम विंडो पोर्टल की निगरानी स्वयं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और चंडीगढ़ स्थित उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा की जा रही है। डीसी ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों की लंबित शिकायतों की साप्ताहिक समीक्षा करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी इसी तरह की ढिलाई पाई गई, तो केवल नोटिस तक सीमित न रहकर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
स्थानीय व्यवस्था और आमजन पर प्रभाव
प्रशासन के इस सख्त रुख से जींद जिले के आम नागरिकों में एक सकारात्मक संदेश गया है। बिजली, पानी, सड़क और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान में अब तेजी आने की उम्मीद है। प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि जनहित के कार्यों में किसी भी स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता नहीं किया जाएगा। आगामी दिनों में लंबित फाइलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा सकता है।




