पानीपत जिले के शैक्षणिक परिदृश्य में उस समय एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ, जब राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सिवाह के प्रांगण में 32वीं जिला स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित वैज्ञानिक मंच पर जिलेभर के उभरते बाल वैज्ञानिकों ने अपनी अकादमिक रचनात्मकता, शोध कौशल और तार्किक सोच का अनूठा प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में कुल 21 टीमों ने हिस्सा लिया और सतत विकास तथा पर्यावरणीय संरक्षण से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं के वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए इन शोध प्रोजेक्ट्स ने यह साबित कर दिया कि आने वाली पीढ़ी विज्ञान के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस संपूर्ण कार्यक्रम की रूपरेखा और संचालन राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद के तत्वावधान में इंडियन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन द्वारा हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिला परियोजना समन्वयक मनीष गुप्ता की अगुवाई में सभी गतिविधियों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया गया। इस वर्ष की बाल विज्ञान कांग्रेस का केंद्रीय विषय 'सततता के लिए विज्ञान में नवाचार' निर्धारित किया गया था। विद्यार्थियों ने इसी विषय को आधार बनाते हुए अपने-अपने शोध मॉडल तैयार किए, जिनमें पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन, नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि संसाधनों के कुशल उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषय प्रमुखता से शामिल रहे।
जुलाई से शुरू हुई थी तैयारी और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया
इस मेगा इवेंट की नींव इसी साल जुलाई और अगस्त के महीनों में ही रख दी गई थी, जब स्कूलों में पंजीकरण प्रक्रिया और प्रारंभिक कक्षाओं का दौर शुरू हुआ था। जिला समन्वयक विकास डागर और जिला अकादमिक समन्वयक सत्यपाल ने जुलाई माह से ही जिलेभर के विभिन्न विद्यालयों के मार्गदर्शक शिक्षकों और छात्र-छात्राओं तक कार्यक्रम की रूपरेखा और दिशा-निर्देश पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया था। शिक्षकों के निरंतर मार्गदर्शन और बच्चों की महीनों की कड़ी मेहनत का ही परिणाम था कि सिवाह स्कूल में आयोजित इस प्रदर्शनी में एक से बढ़कर एक बेहतरीन और उपयोगी प्रोजेक्ट देखने को मिले।
विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए इन शोध प्रोजेक्ट्स के मूल्यांकन के लिए एक विशेष और विशेषज्ञ निर्णायक मंडल का गठन किया गया था। इस पैनल में रसायन विज्ञान के प्रख्यात प्रवक्ता श्रीकांत, भौतिक विज्ञान के अनुभवी प्रवक्ता कुलदीप सिंह और गणित के विशेषज्ञ प्रवक्ता रणबीर सिंह ने अपनी निष्पक्ष और गहरी सूझबूझ से प्रत्येक प्रोजेक्ट की बारीकी से जांच की। निर्णायक मंडल ने मॉडलों की वैज्ञानिक सटीकता, मौलिकता और व्यावहारिक उपयोगिता के आधार पर अंकों का निर्धारण किया, जिससे पूरी प्रतियोगिता में पूर्ण पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकी।
| विवरण | तथ्य एवं आंकड़े |
|---|---|
| आयोजन स्थल | राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सिवाह (पानीपत) |
| कार्यक्रम का नाम | 32वीं जिला स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस |
| मुख्य विषय | सततता के लिए विज्ञान में नवाचार |
| कुल प्रतिभागी टीमें | 21 शोध टीमें |
| राज्य स्तर के लिए चयनित टीमें | 10 टीमें |
| राज्य स्तरीय प्रतियोगिता तिथि | 27-28 नवंबर (कुरुक्षेत्र) |
| नेतृत्व एवं सहयोग | जिला परियोजना समन्वयक मनीष गुप्ता व जिला समन्वयक विकास डागर |
अधिकारियों और शिक्षकों की दूरगामी सोच का दिखा असर
कार्यक्रम के सफल और निर्बाध संचालन में विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेंद्र कादियान, एपीसी कुलभूषण जैन और डीएसएस संदीप की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। इन प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षाविदों ने आयोजन स्थल पर सुरक्षा, व्यवस्था और बच्चों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के वैज्ञानिक आयोजनों से स्कूली स्तर पर ही बच्चों के भीतर शोध करने की प्रवृत्ति और तार्किक जिज्ञासा जागृत होती है, जो आगे चलकर उन्हें देश के बेहतरीन वैज्ञानिक और तकनीकि विशेषज्ञ बनने की राह दिखाती है।
इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से सभी विजेता और सहभागी विद्यार्थियों की पीठ थपथपाई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया किताबी ज्ञान के साथ-साथ प्रायोगिक और शोध आधारित शिक्षा आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। जब विद्यार्थी किताबी सिद्धांतों को जमीन पर उतारकर किसी समस्या का समाधान खोजते हैं, तो उनका बौद्धिक विकास कई गुना तेजी से होता है।
"राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस केवल एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह हमारे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध की प्रवृत्ति और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करने का एक ऐसा सशक्त मंच है जो उनके भविष्य की नींव मजबूत करता है।" - विकास डागर, जिला समन्वयक
कुरुक्षेत्र में होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए कसी कमर
जिला स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के बाद अब चयनित 10 टीमें आगामी 27 और 28 नवंबर को कुरुक्षेत्र में आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में शिरकत करेंगी। इन प्रतिभाशाली बाल वैज्ञानिकों के कंधों पर अब पूरे पानीपत जिले का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी है। जिला स्तर पर मिली सफलताओं से उत्साहित ये छात्र अब अपने प्रोजेक्ट्स में और अधिक परिपक्वता लाने के लिए अपने गाइड टीचर्स के साथ मिलकर अंतिम रिहर्सल और शोध के बचे हुए पहलुओं को सुधारने में जुट गए हैं।
प्रशासन और शिक्षा विभाग को पूरी उम्मीद है कि पानीपत के ये युवा वैज्ञानिक राज्य स्तर पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ेंगे और जिले का नाम रोशन करेंगे। स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन न केवल विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा कर रहा है, बल्कि अभिभावकों और समाज के बीच भी यह संदेश दे रहा है कि आने वाला युग नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान का ही है।




