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पानीपत उपभोक्ता आयोग का कड़ा रुख: हीरो फिनकॉर्प को RTI एक्टिविस्ट के ₹1.23 लाख ब्याज सहित लौटाने का आदेश

पानीपत जिला उपभोक्ता आयोग ने हीरो फिनकॉर्प द्वारा प्री-पेमेंट के नाम पर की गई अतिरिक्त वसूली को अनुचित ठहराते हुए ब्याज व मुआवजे सहित राशि लौटाने का ऐतिहासिक निर्णय।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
2 नवंबर 2026 को 12:10 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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पानीपत उपभोक्ता आयोग का कड़ा रुख: हीरो फिनकॉर्प को RTI एक्टिविस्ट के ₹1.23 लाख ब्याज सहित लौटाने का आदेश
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •हीरो फिनकॉर्प ने प्री-पेमेंट के नाम पर RTI कार्यकर्ता पीपी कपूर से वसूले थे अतिरिक्त 1.23 लाख रुपये।
  • •उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की कार्यप्रणाली को सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया।
  • •9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 11 हजार रुपये मुआवजा और 5500 रुपये कानूनी खर्च देने के निर्देश।
  • •निर्धारित 45 दिनों की अवधि में भुगतान न करने पर कंपनी को 12 प्रतिशत की दर से देना होगा ब्याज।

पानीपत लाइव ब्यूरो: उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में पानीपत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक बड़ा और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। आयोग ने वित्त क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हीरो फिनकॉर्प को आदेश दिए हैं कि वह समालखा निवासी और प्रसिद्ध आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता पीपी कपूर से प्री-पेमेंट के नाम पर अवैध रूप से वसूली गई 1,23,008 रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करे।

यह मामला वित्तीय संस्थानों द्वारा ग्राहकों पर थोपे जाने वाले गुप्त और अनुचित शुल्कों के खिलाफ एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ऋण समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर ग्राहकों से अतिरिक्त धन वसूलना न केवल अनैतिक है, बल्कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दंडनीय भी है।

ऋण चुकाने के बाद सामने आई अतिरिक्त वसूली की हकीकत

मामले की पृष्ठभूमि में जाते हुए बता दें कि समालखा के रहने वाले पीपी कपूर ने जून 2018 में दिल्ली स्थित हीरो फिनकॉर्प कंपनी से अपनी संपत्ति के बदले 27,25,979 रुपये का ऋण लिया था। कपूर ने वित्तीय अनुशासन का परिचय देते हुए 7 दिसंबर 2020 को अपने ऋण की पूरी राशि समय से पहले एकमुश्त चुका दी थी।

ऋण चुकता करने के बाद जब पीपी कपूर ने भुगतान का विस्तृत विवरण (Statement of Account) मांगा, तो वह यह देखकर दंग रह गए कि कंपनी ने 'प्री-पेमेंट चार्जेस' के नाम पर उनसे 1,23,008 रुपये अतिरिक्त काट लिए हैं। कपूर ने इसे ऋण समझौते की शर्तों का सीधा उल्लंघन बताते हुए कंपनी से राशि वापस करने का आग्रह किया। हालांकि, कंपनी ने अतिरिक्त वसूली की बात स्वीकार करने के बावजूद पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद कपूर ने 16 अप्रैल 2021 को जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली।

विवरणआयोग द्वारा निर्धारित राशि / दर
रिफंड राशि (अतिरिक्त वसूली)₹1,23,008
ब्याज दर (समय पर भुगतान पर)9% वार्षिक (16 अप्रैल 2021 से)
मानसिक प्रताड़ना हेतु मुआवजा₹11,000
कानूनी कार्यवाही का खर्च₹5,500
विलंब पर दंड ब्याज दर12% वार्षिक (45 दिन बाद)

आयोग की पीठ ने कंपनी की दलीलों को किया खारिज

आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की संयुक्त पीठ ने इस मामले की गहन सुनवाई की। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और साक्ष्यों का अवलोकन किया गया। आयोग ने पाया कि कंपनी द्वारा वसूला गया प्री-पेमेंट शुल्क अनुचित था और यह उपभोक्ता के साथ किए गए मूल अनुबंध की भावना के विपरीत था।

आयोग ने अपने आदेश में सख्त लहजे में कहा कि वित्तीय कंपनियों को यह अधिकार नहीं है कि वे मनमाने ढंग से ग्राहकों की जेब पर डाका डालें। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायत दर्ज करने की तारीख यानी 16 अप्रैल 2021 से लेकर आदेश की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ मूल राशि का भुगतान करे। इसके साथ ही उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 11 हजार रुपये और अदालती कार्यवाही के खर्च के रूप में 5,500 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।

"यह फैसला उन सभी उपभोक्ताओं के लिए उम्मीद की किरण है जो बड़ी कंपनियों की मनमानी के आगे खुद को असहाय महसूस करते हैं। वित्तीय पारदर्शिता हर नागरिक का अधिकार है।" - पीपी कपूर, आरटीआई कार्यकर्ता

स्थानीय जनजीवन और उपभोक्ताओं पर फैसले का प्रभाव

पानीपत और समालखा क्षेत्र के नागरिकों के बीच इस फैसले की व्यापक चर्चा है। अक्सर देखा जाता है कि लोग बैंक या फाइनेंस कंपनियों के जटिल नियमों और कानूनी पचड़ों के डर से अपने हक की आवाज नहीं उठाते। पीपी कपूर द्वारा लड़ी गई यह कानूनी लड़ाई यह संदेश देती है कि यदि आपके पास सही तथ्य और धैर्य है, तो न्याय व्यवस्था आपकी सुरक्षा के लिए तत्पर है।

स्थानीय कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय के बाद फाइनेंस कंपनियों को अपने 'हिडन चार्जेस' और प्री-पेमेंट नीतियों की समीक्षा करनी होगी। यह फैसला न केवल पीपी कपूर के लिए एक व्यक्तिगत जीत है, बल्कि यह पानीपत जिले के हजारों अन्य ऋणधारकों के लिए भी एक सुरक्षा कवच का काम करेगा।

आगे की कानूनी स्थिति और समय सीमा

उपभोक्ता आयोग ने हीरो फिनकॉर्प को इस पूरे भुगतान के लिए 45 दिनों का समय दिया है। यदि कंपनी इस समय सीमा के भीतर राशि का भुगतान करने में विफल रहती है, तो उसे पूरी देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। यह सख्त निर्देश इसलिए दिया गया है ताकि आदेश का कार्यान्वयन त्वरित रूप से सुनिश्चित हो सके और उपभोक्ता को अपने ही पैसे के लिए और अधिक इंतजार न करना पड़े।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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