हरियाणा के औद्योगिक शहर पानीपत के जिला नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक करने की मुहिम आम जनता के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। अस्पताल प्रशासन द्वारा ओपीडी पंजीकरण काउंटर पर 5 रुपये के मामूली पर्चा शुल्क के लिए पूरी तरह ऑनलाइन भुगतान अनिवार्य किए जाने से रोजाना आने वाले सैकड़ों मरीजों को भारी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। विशेष रूप से बुजुर्गों, अशिक्षितों और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों के लिए यह कैशलेस व्यवस्था एक बड़ी मुसीबत बन गई है।
सोमवार को सप्ताह के पहले दिन ओपीडी खुलते ही अस्पताल के पंजीकरण काउंटरों पर अचानक भीड़ उमड़ पड़ी। जैसे ही काउंटर कर्मियों ने 5 रुपये नगद लेने से मना करते हुए केवल ऑनलाइन (UPI/क्यूआर कोड) से ही भुगतान करने की शर्त रखी, तो वहां मौजूद मरीजों में हड़कंप मच गया। जिन लोगों के पास की-पैड वाले साधारण मोबाइल थे या जो डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करना नहीं जानते थे, वे बेबस नजर आए। स्थिति यह बनी कि कई लोगों को अपने पंजीकरण के लिए कतार में खड़े अन्य अनजान लोगों से यूपीआई के जरिए ₹5 कटवाने के लिए मिन्नतें करनी पड़ीं।
ऑनलाइन पर्ची प्रणाली और धरातल पर मरीजों की बेबसी
अस्पताल की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान देखा गया कि डिजिटल साक्षरता के अभाव में डिजिटल पेमेंट की यह बाध्यता मरीजों पर भारी पड़ रही है। जिन मरीजों के पास स्मार्ट फोन नहीं है या जिनके बैंक खातों में यूपीआई लिंक नहीं है, उन्हें काउंटर से वापस लौटाया जा रहा है। कई बुजुर्ग मरीज जो अपनी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अकेले अस्पताल पहुंचे थे, उन्हें घंटों तक कतार के पास किसी ऐसे मददगार की तलाश करनी पड़ी जो उनके 5 रुपये अपने फोन से ट्रांसफर कर सके।
इतना ही नहीं, पंजीकरण की बाधा पार करने के बाद भी मरीजों की परेशानी कम नहीं हुई। अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में डॉक्टरों के कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी-लंबी कतारें दिखाई दीं। विशेष रूप से हड्डी रोग विभाग (ऑर्थोपेडिक्स) में स्थिति बेहद खराब रही, जहाँ विशेषज्ञ चिकित्सक के ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में चले जाने के कारण ओपीडी जांच कक्ष काफी देर तक ठप रहा। इसके चलते दूर-दराज के गांवों से आए मरीजों को दर्द से कराहते हुए घंटों गैलरी में इंतजार करना पड़ा।
| व्यवस्थागत बिंदु | नागरिक अस्पताल की वर्तमान स्थिति | मरीजों व जनजीवन पर असर |
|---|---|---|
| पंजीकरण पर्चा शुल्क | ₹5 (केवल ऑनलाइन भुगतान स्वीकृत) | बिना स्मार्टफोन वाले बुजुर्ग व ग्रामीण सबसे ज्यादा प्रभावित |
| पंजीकरण कतार समय | 45 मिनट से 2 घंटे तक का विलंब | भीड़ का दबाव बढ़ा, दूसरे लोगों से मदद मांगने को मजबूर |
| विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्धता | ओपीडी समय में ओटी ड्यूटी का सामंजस्य अभाव | हड्डी रोग व अन्य विशेषज्ञ कक्षों के बाहर भारी भीड़ |
| वैकल्पिक कैश काउंटर | वर्तमान में पूरी तरह बंद या सीमित | डिजिटल पेमेंट फेल होने पर बिना इलाज लौटना पड़ रहा |
अधिकारियों का रुख और व्यवस्था सुधार पर विभागीय आश्वासन
इस पूरे मामले पर पानीपत लाइव ब्यूरो ने जब स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से बात की, तो उन्होंने इसे डिजिटल इंडिया अभियान के तहत शुरू की गई पारदर्शी पहल करार दिया। हालांकि, धरातल पर आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को भी खारिज नहीं किया जा सकता। अधिकारियों का मानना है कि कैशलेस लेनदेन से अस्पताल के राजस्व रिकॉर्ड और पर्ची काउंटर पर होने वाली धांधली या लंबे कैश मिलान की समस्या खत्म होगी।
"डिजिटल भुगतान की यह व्यवस्था शासन के निर्देशों के अनुसार पारदर्शिता लाने और मरीजों के कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। शुरुआती दौर में कुछ ग्रामीण व बुजुर्ग मरीजों को असुविधा होना स्वाभाविक है, लेकिन जल्द ही कर्मचारियों को सहयोग के लिए तैनात किया जाएगा ताकि किसी भी मरीज को बिना इलाज के न लौटना पड़े।" - डॉ. विजय मलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), पानीपत
स्थानीय जनजीवन, मरीजों की आपबीती और जमीनी हकीकत
पानीपत जिले के ग्रामीण आंचल सींक गांव से आए मरीज हरपाल सिंह ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनके पैर के अंगूठे में गंभीर कालापन और संक्रमण की शिकायत है। वे पिछले 20 दिनों से अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। सोमवार को सुबह 10 बजे ही वे लाइन में लग गए थे, लेकिन 5 रुपये की पर्ची के लिए ऑनलाइन भुगतान की शर्त ने उनके दो घंटे बर्बाद कर दिए। जैसे-तैसे पंजीकरण हुआ तो कक्ष में मौजूद सहायक डॉक्टर ने उन्हें सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन से ही जांच कराने को कहा, जो उस वक्त ओटी में आपातकालीन ऑपरेशन कर रहे थे। नतीजतन उन्हें बिना जांच के ही वापस लौटना पड़ा।
वहीं, पानीपत के संजय चौक निवासी महावीर ने बताया कि उनके पैरों में जोड़ों का तेज दर्द है। अस्पताल पहुंचने पर जब उन्हें पता चला कि 5 रुपये की पर्ची केवल मोबाइल स्कैन से कटेगी, तो वे घबरा गए क्योंकि उनके पास साधारण की-पैड फोन था। उन्होंने लाइन में खड़े तीन-चार लोगों से मिन्नतें कीं, तब जाकर किसी सहृदय युवक ने अपने मोबाइल से उनका 5 रुपये का भुगतान किया। करीब दो घंटे कतार में खड़े रहने के बाद ही उनका पंजीकरण संभव हो सका।
समस्या के समाधान हेतु प्रशासनिक कदम और सुझाव
पानीपत लाइव की ग्राउंड रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि किसी भी तकनीकी बदलाव को लागू करने से पहले जमीनी स्तर की तैयारी और जन जागरूकता बेहद आवश्यक है। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना औसतन 1500 से 2000 मरीज ओपीडी में आते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि का होता है। यदि अस्पताल प्रशासन पूरी तरह ऑनलाइन भुगतान की शर्त रखना चाहता है, तो कम से कम एक हेल्पडेस्क या कम से कम एक 'कैश काउंटर' उन लोगों के लिए जरूर आरक्षित रखा जाना चाहिए जिनके पास डिजिटल साधन नहीं हैं। साथ ही ओपीडी के समय में डॉक्टरों की ओटी शेड्यूल को इस तरह व्यवस्थित किया जाना चाहिए कि परामर्श का समय प्रभावित न हो।




