पानीपत लाइव ब्यूरो: हरियाणा के औद्योगिक शहर पानीपत में सोमवार को एक दर्दनाक औद्योगिक हादसा सामने आया है। शहर के काबड़ी रोड स्थित एक कपड़ा फैक्ट्री के गोदाम में काम के दौरान भारी-भरकम कपड़े की गांठ गिरने से एक 42 वर्षीय श्रमिक की जान चली गई। मृतक की पहचान मंटू कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के छपरा जिले का रहने वाला था और पिछले ढाई दशकों से पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में अपनी सेवाएं दे रहा था। इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों और गोदामों में श्रमिकों की सुरक्षा और वहां अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना सोमवार की है जब मंटू कुमार हमेशा की तरह काबड़ी रोड स्थित 'हरे कृष्णा फैक्ट्री' के गोदाम में काम पर गया था। वहां वह कपड़ों की छंटाई और उन्हें व्यवस्थित करने का कार्य कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब वह गांठों के बीच काम कर रहा था, तभी ऊपर रखी एक विशालकाय और भारी गांठ अचानक संतुलन बिगड़ने से उसके ऊपर गिर गई। मंटू को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वह उस भारी वजन के नीचे पूरी तरह दब गया।
हादसे के बाद गोदाम में मची अफरा-तफरी
जैसे ही हादसा हुआ, गोदाम में मौजूद अन्य साथी मजदूरों में हड़कंप मच गया। शोर सुनकर आसपास के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद मंटू को भारी गांठ के नीचे से बाहर निकाला। उस वक्त उसकी हालत बेहद नाजुक थी। साथी मजदूर उसे तुरंत एम्बुलेंस या निजी वाहन की सहायता से पास के एक निजी अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की और प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन आंतरिक चोटें इतनी गंभीर थीं कि उपचार के दौरान ही मंटू ने दम तोड़ दिया।
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| मृतक का नाम | मंटू कुमार (उम्र 42 वर्ष) |
| घटना स्थल | हरे कृष्णा फैक्ट्री गोदाम, काबड़ी रोड, पानीपत |
| स्थायी पता | जिला छपरा, बिहार |
| वर्तमान निवास | गंगाराम कॉलोनी, पानीपत (किरायेदार) |
| हादसे का कारण | कपड़े की भारी गांठ के नीचे दबना |
25 साल से पानीपत को बनाया था कर्मभूमि, पीछे छोड़ गया दो बच्चे
मंटू कुमार की मौत की खबर जैसे ही गंगाराम कॉलोनी स्थित उसके निवास पर पहुंची, वहां मातम पसर गया। मंटू के पड़ोसियों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसी जितेंद्र ने बताया कि मंटू एक बेहद मेहनती और मिलनसार व्यक्ति था। वह पिछले 25 सालों से पानीपत में रहकर मजदूरी कर रहा था और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। वह अपने पीछे दो बच्चों और पत्नी को छोड़ गया है, जिनके सिर से अब पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है। बिहार से पानीपत आकर उसने यहां की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में अपनी आधी उम्र बिता दी थी, लेकिन किसे पता था कि जिस काम से उसका घर चलता है, वही उसकी मौत का कारण बनेगा।
"फैक्ट्री के गोदामों में गांठों की स्टैकिंग (रखने का तरीका) अक्सर असुरक्षित होता है। भारी गांठों को काफी ऊंचाई तक बिना किसी उचित सपोर्ट के रख दिया जाता है, जिससे नीचे काम कर रहे मजदूरों की जान हमेशा जोखिम में रहती है। इस मामले में भी लापरवाही की जांच होनी चाहिए।" - स्थानीय श्रमिक यूनियन प्रतिनिधि (संकेतात्मक)
पुलिस की कार्रवाई और आगामी जांच
अस्पताल से सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पुलिस ने मृतक के परिजनों के बयान दर्ज किए हैं और शव को पोस्टमार्टम के लिए पानीपत के नागरिक अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे फैक्ट्री परिसर और गोदाम का निरीक्षण करेंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वहां सुरक्षा उपकरणों या सुरक्षित कार्य प्रणाली की कमी थी। यदि इस मामले में फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो कानून के तहत उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
औद्योगिक सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल
पानीपत के औद्योगिक क्षेत्रों, विशेषकर काबड़ी रोड, सेक्टर 25 और सेक्टर 29 के गोदामों में अक्सर इस तरह के हादसे देखने को मिलते हैं। कई बार पुरानी और जर्जर इमारतों या गांठों के गलत तरीके से भंडारण के कारण मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। श्रम विभाग और औद्योगिक सुरक्षा विभाग को समय-समय पर इन गोदामों का ऑडिट करना चाहिए ताकि भविष्य में मंटू जैसे किसी अन्य निर्दोष श्रमिक की जान न जाए। फिलहाल, गंगाराम कॉलोनी और मंटू के पैतृक गांव छपरा में इस हादसे के बाद शोक की लहर है।




