पानीपत जंक्शन पर पटरियों पर दौड़ने वाली एक्सप्रेस गाड़ियों की लेटलतीफी कम होने का नाम नहीं ले रही है, जिसके चलते सफर करने वाले आम जनमानस को भारी मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरना पड़ रहा है। रेलवे की यह लचर व्यवस्था उस समय खुलकर सामने आई जब शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को अपनी निर्धारित गाड़ियों के आने का घंटों इंतजार करना पड़ा। इस दौरान बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को प्लेटफार्म पर ही वक्त गुजारना पड़ा, जिससे रेलवे प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि समय पर ट्रेन न मिलने के कारण उनके आगे के सभी कार्यक्रम और जरूरी काम पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाते हैं।
ताजा प्रकरण के तहत, सोमवार का पूरा दिन यात्रियों के लिए बेहद कष्टदायक साबित हुआ। रेलवे के आधिकारिक शेड्यूल के उलट इस मार्ग पर चलने वाली प्रमुख गाड़ियां अपने तय समय से मीलों पीछे चलती नजर आईं। इस अफरा-तफरी के माहौल में दूरदराज के इलाकों में जाने वाले मुसाफिर स्टेशन के पूछताछ काउंटर और डिस्प्ले बोर्ड के चक्कर काटते दिखाई दिए। स्थानीय स्तर पर पानीपत लाइव ब्यूरो की टीम द्वारा जुटाई गई ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, ठंड या बदलते मौसम के बीच स्टेशन पर घंटों फंसे रहना यात्रियों के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं था। रेल यात्रियों ने अब उच्च स्तर पर इस व्यवस्था को दुरुस्त किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है ताकि भविष्य में ऐसी अवांछित परिस्थितियों से बचा जा सके।
लंबी दूरी की ट्रेनों के घंटों पिछड़ने से यात्रियों का हाल बेहाल
सोमवार का दिन पानीपत रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बेहद थकान भरा रहा। स्थिति यह थी कि देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण रेलगाड़ियां अपने निर्धारित समय से कोसों दूर थीं। यात्रियों को यह तक नहीं पता चल पा रहा था कि उनकी गाड़ी वास्तव में किस समय स्टेशन पर पहुंचेगी। इस अनिश्चितता के कारण प्लेटफार्म पर बैठे मुसाफिरों की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही थी। रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का इस प्रकार घंटों पिछड़ जाना यात्रियों की छुट्टियों और जरूरी यात्राओं के समय को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे समय की पाबंदी को ध्यान में रखते हुए घंटों पहले घर से निकल आए थे, लेकिन रेलवे की लेटलतीफी ने उनकी सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थानीय यात्रियों राकेश, रोहित और सुरजीत ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ किसी आवश्यक कार्य से दूसरे शहर जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जब गाड़ी का कोई अता-पता नहीं चला तो उन्हें प्लेटफार्म पर ही अनिश्चितकाल के लिए बैठना पड़ा। यात्रियों का कहना है कि जब वे रेलवे कर्मचारियों से इस देरी का कारण पूछते हैं तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। बार-बार गाड़ियों के समय में बदलाव होने से बच्चों और महिलाओं को भुखमरी और थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यात्रियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि रेलवे को अपनी इस व्यवस्था में तुरंत सुधार लाना चाहिए ताकि आम जनता को इस प्रकार की अनावश्यक परेशानियों से दो-चार न होना पड़े।
| ट्रेन का नाम | निर्धारित रूट/दिशा | विलंब अवधि (देरी) |
|---|---|---|
| अमृतसर एक्सप्रेस | डाउन/अप रूट | 13 घंटे |
| सचखंड एक्सप्रेस | डाउन/अप रूट | 12 घंटे |
| झेलम एक्सप्रेस | डाउन/अप रूट | डेढ़ घंटे |
| नेताजी एक्सप्रेस | डाउन/अप रूट | लगभग 1 घंटा |
| जम्मू मेल | डाउन/अप रूट | लगभग 1 घंटा |
रेलवे अधिकारियों की सफाई और ट्रैक मरम्मत का तकनीकी पहलू
ट्रेनों के इस तरह बेपटरी समय चक्र को लेकर जब रेलवे महकमे के जिम्मेदार अधिकारियों से बातचीत की गई तो उन्होंने इसके पीछे तकनीकी और परिचालन संबंधी कई बड़ी वजहें गिनाईं। अधिकारियों का तर्क है कि रेलवे नेटवर्क पर इस समय विभिन्न स्थानों पर आधुनिकीकरण और पटरियों के रखरखाव का भारी कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। इसके अलावा, मालगाड़ियों और अति-महत्वपूर्ण राजधानी या वंदे भारत जैसी ट्रेनों को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता देने के लिए स्थानीय व सामान्य रूट की गाड़ियों को बीच के स्टेशनों पर रोकना पड़ता है। इस पासिंग प्रक्रिया की वजह से पीछे आ रही अन्य एक्सप्रेस गाड़ियों की संपूर्ण श्रृंखला प्रभावित होती है और वे एक-एक करके घंटों पिछड़ जाती हैं।
रेलवे प्रशासन का यह भी मानना है कि सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर ट्रेनों का संचालन नहीं किया जा सकता, इसलिए जहां कहीं भी ट्रैक पर मेंटेनेंस का काम चल रहा है, वहां गति सीमा को सीमित करना अनिवार्य हो जाता है। हालांकि, अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि इस प्रकार की असुविधाओं को कम से कम करने के लिए रूट प्लानिंग पर नए सिरे से काम किया जा रहा है। स्टेशन परिसर में यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है ताकि यदि गाड़ियां किसी कारणवश लेट भी हों, तो यात्रियों को बैठने, पीने के पानी और अन्य जरूरी चीजों के लिए भटकना न पड़े। रेलवे प्रबंधन लगातार स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
"लोकल और अन्य ट्रेनों को लंबे रूटों की ट्रेनों की पासिंग के लिए स्टेशन पर ठहराव कराना पड़ता है। साथ ही कई जगहों पर चल रहे रेलवे ट्रैक पर मरम्मत कार्य भी इसके मुख्य कारण हैं। इससे ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता है, और इस समस्या का जल्द ही स्थायी समाधान कराया जाएगा।" - मनीष कुमार शर्मा, स्टेशन अधीक्षक, पानीपत
यात्रियों की सुरक्षा, मांग और आगामी प्रशासनिक कदम
पानीपत जंक्शन से रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों की यह मांग अब मुखर होने लगी है कि रेलवे बोर्ड को लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन में हो रही इस प्रकार की भारी अनियमितताओं के खिलाफ सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करना चाहिए। यात्रियों का कहना है कि यदि किसी ट्रेन को तकनीकी कारणों से रोकना भी पड़े, तो उसकी सही और सटीक लाइव लोकेशन की जानकारी डिजिटल माध्यमों से लगातार अपडेट की जानी चाहिए ताकि लोग घर से ही सही समय का अंदाजा लगाकर स्टेशन के लिए निकल सकें। बार-बार की इस लेटलतीफी से केवल समय का ही नुकसान नहीं होता, बल्कि यात्रियों की व्यावसायिक और व्यक्तिगत बैठकें भी रद्द हो जाती हैं, जिससे उन्हें आर्थिक मोर्चे पर भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
आने वाले दिनों में यदि रेलवे प्रशासन द्वारा पटरियों के रख-रखाव के कार्यों को तय समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया, तो यात्रियों का यह आक्रोश और अधिक बढ़ सकता है। स्थानीय स्तर पर सामाजिक संगठनों ने भी रेलवे मंत्रालय को पत्र लिखकर पानीपत स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव और समयबद्धता को सुधारने की मांग पर जोर दिया है। फिलहाल, स्टेशन अधीक्षक की ओर से मिले आश्वासन के बाद यात्रियों को उम्मीद बंधी है कि आने वाले हफ्तों में स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा, बशर्ते प्रशासनिक अमला धरातल पर अपनी कार्यशैली में तेजी लाए।




