हरियाणा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही आबोहवा जहरीली होने लगी है। प्रदेश के आसमान पर स्मॉग की सफेद चादर अब साफ तौर पर देखी जा सकती है। रविवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में जबरदस्त उछाल देखा गया, जो अब 'खराब' से 'खतरनाक' श्रेणी की ओर बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रविवार को प्रदेश का औसत AQI 247 दर्ज किया गया, जबकि ठीक एक दिन पहले शनिवार को यह मात्र 69 था। हवा की गति थमने और बढ़ती ठंड के कारण धूल और धुएं के कण वायुमंडल की निचली सतह पर जमा हो रहे हैं, जिससे विजिबिलिटी में भी कमी आई है।
प्रशासनिक स्तर पर पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। हरियाणा कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी का ही परिणाम है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार खेतों में आग लगाने की घटनाओं में काफी गिरावट आई है। हालांकि, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। इस सीजन में अब तक करीब पौने छह एकड़ भूमि पर पराली जलाने के मामले सामने आए हैं, जिसके आधार पर तीन किसानों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
प्रदूषण और प्रशासनिक कार्रवाई का तुलनात्मक विवरण
| विवरण | वर्ष 2023 (1 नवंबर तक) | वर्ष 2024 (वर्तमान स्थिति) |
|---|---|---|
| औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) | 326 (अत्यधिक गंभीर) | 247 (खराब श्रेणी) |
| पराली जलाने पर दर्ज FIR | 12 मामले | 03 मामले |
| प्रभावित कृषि क्षेत्र (एकड़ में) | 25 एकड़ | 5.75 एकड़ |
| प्रशासनिक निगरानी का तरीका | मैनुअल एवं सैटेलाइट | HARSAC रियल-टाइम सैटेलाइट |
HARSAC की सैटेलाइट निगरानी और मालसरी खेड़ा का मामला
हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसैक) की सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए प्रदेश के कोने-कोने पर नजर रखी जा रही है। रविवार को सैटेलाइट के माध्यम से मालसरी खेड़ा गांव की एक संदिग्ध लोकेशन प्राप्त हुई है, जहाँ फसल अवशेष जलाने की सूचना मिली है। कृषि विभाग की विशेष टीम सोमवार को मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करेगी। यदि मौके पर अवशेष जलाए जाने के साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित किसान के विरुद्ध न केवल एफआईआर दर्ज होगी, बल्कि भारी जुर्माना भी वसूला जाएगा।
"हमारा प्राथमिक उद्देश्य किसानों को दंडित करना नहीं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा करना है। हमने प्रत्येक गांव में निगरानी कमेटियां गठित की हैं। किसानों को बेलर मशीनों के जरिए पराली प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि उन्हें अवशेष जलाने की आवश्यकता न पड़े।"
अधिकारियों की अपील और उपलब्ध संसाधन
जिला कृषि उप निदेशक डॉ. सुखदेव कंबोज ने बताया कि विभाग की टीमें लगातार गांवों का दौरा कर रही हैं। किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि वे कंबाइन से कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों की गांठें बनाने के लिए 'बेलर' मशीन का उपयोग करें। प्रशासन द्वारा किसानों को बेलर मशीनें रियायती दरों और आसान उपलब्धता के साथ प्रदान की जा रही हैं। डॉ. कंबोज ने स्पष्ट किया कि पराली जलाना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरक शक्ति को भी नष्ट कर देता है।
जनजीवन और स्वास्थ्य पर बढ़ते स्मॉग का प्रभाव
बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों में सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश की समस्याएं बढ़ गई हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि सुबह और शाम के समय सैर करने से बचें और बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें। मौसम विभाग के अनुसार, यदि आने वाले दिनों में हवा की गति नहीं बढ़ी और बारिश नहीं हुई, तो प्रदूषण का स्तर और अधिक भयावह हो सकता है। प्रशासन ने निर्माण कार्यों और धूल उड़ाने वाली गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ा दी है।
आगामी रणनीति और सख्त निगरानी
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में निगरानी और सख्त की जाएगी। सभी खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों (BDPO) और ग्राम सचिवों को अपने-अपने क्षेत्रों में मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। जो किसान पराली प्रबंधन के आधुनिक तरीकों को अपना रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई जा रही है, जबकि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ रेड एंट्री (Red Entry) जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे उन्हें भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई हो सकती है।




