पानीपत जिले के ग्रामीण इलाकों में धान कटाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसराना और मतलौडा ब्लॉकों की स्थिति अन्य क्षेत्रों से भिन्न बनी हुई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जहां पानीपत, समालखा और बापौली ब्लॉकों में अधिकांश धान की कटाई पूरी हो चुकी है, वहीं इसराना और मतलौडा में अभी तक बमुश्किल 30 प्रतिशत फसल ही कट पाई है। कृषि विभाग ने इस अंतर को गंभीरता से लेते हुए इन दोनों ब्लॉकों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है, ताकि आगामी दिनों में पराली जलाने की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सके।
फसल कटाई के इस महत्वपूर्ण चरण के दौरान पर्यावरण संरक्षण और वायु गुणवत्ता बनाए रखने की चुनौती प्रशासन के सामने सबसे बड़ी है। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने धरातल पर सक्रियता बढ़ा दी है। इसराना मंडी स्थित खंड कृषि कार्यालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई, जिसकी अध्यक्षता विभाग के एसडीओ देवेंद्र कुहाड़ ने की। इस बैठक में क्षेत्र के तमाम कृषि अधिकारियों, कृषि विकास अधिकारियों और तकनीकी सहायकों ने हिस्सा लिया, जिसमें मुख्य रूप से पराली प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर मंथन किया गया।
दिवाली पर भी नहीं मिलेगा विश्राम, खेतों में तैनात रहेंगी विशेष टीमें
प्रशासनिक सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस बार त्योहारी सीजन यानी दीपावली के पावन पर्व पर भी कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों को कोई अवकाश नहीं मिलेगा। एसडीओ देवेंद्र कुहाड़ ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि गांव-गांव में तैनात की गई 246 विशेष टीमें निरंतर खेतों में गश्त करेंगी। इन टीमों का मुख्य दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि किसान धान के अवशेषों यानी पराली को खेतों में आग न लगाएं, बल्कि आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से उनका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। यदि कोई भी किसान नियमों की अवहेलना करता पाया जाता है, तो मौके पर ही प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे सुबह से शाम तक ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय रहें और किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित करें। कृषि विभाग का मानना है कि केवल प्रशासनिक दंड के बजाय किसानों को जागरूक करके ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। इसके अलावा, जिन किसानों के पास अभी तक अपनी फार्मर आईडी नहीं है, उन्हें भी इस अभियान के दायरे में लाया जा रहा है ताकि भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक असुविधा का सामना न करना पड़े।
| कृषि ब्लॉक | धान कटाई की वर्तमान स्थिति | गठित गांव-स्तरीय टीमें | विशेष प्रशासनिक निर्देश |
|---|---|---|---|
| इसराना ब्लॉक | लगभग 30 प्रतिशत पूर्ण | सक्रिय ग्राम टीमें | दिवाली अवकाश रद्द, खेतों में लगातार निगरानी |
| मतलौडा ब्लॉक | लगभग 30 प्रतिशत पूर्ण | सक्रिय ग्राम टीमें | पराली प्रबंधन और फार्मर आईडी पर फोकस |
| समालखा, पानीपत व बापौली | अधिकांश कार्य प्रगति पर | मानक निगरानी दल | सामान्य दिशा-निर्देश जारी |
फार्मर आईडी के बिना रुक सकती है पीएम किसान सम्मान निधि
धान कटाई और पराली प्रबंधन के साथ-साथ इस बैठक में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर भी एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक अपडेट या तैयार नहीं हुई है, उन्हें आगामी किस्तों का लाभ मिलने में तकनीकी बाधा आ सकती है। इस दिशा में कदम उठाते हुए ग्राम स्तरीय टीमों को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे खेतों और गांवों में जाकर किसानों को फार्मर आईडी के महत्व के बारे में बताएं और इसे समय रहते बनवाने में सहायता करें।
इस अवसर पर खंड कृषि अधिकारी शमशेर मलिक, एडीओ डॉ. अक्षय कुमार, सहायक तकनीकी प्रबंधक ओमपाल मलिक, संदीप नैन और अनिल कुमार समेत कई प्रमुख कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और यह संकल्प लिया कि इसराना और मतलौडा ब्लॉक में पर्यावरण नियमों का शत-प्रतिशत पालन करवाया जाएगा। स्थानीय प्रशासन की इस सक्रियता से उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार फसल कटाई का सीजन पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल तरीके से संपन्न होगा।
"इसराना और मतलौडा ब्लॉकों में अभी करीब 70 प्रतिशत धान की कटाई शेष है, इसलिए हमारी प्राथमिकता इन दोनों क्षेत्रों पर है। पराली प्रबंधन की निगरानी के लिए गठित गांव-स्तरीय टीमों के कर्मचारियों की दिवाली पर भी छुट्टी नहीं होगी और उन्हें लगातार खेतों में रहना होगा। इसके साथ ही किसानों को उनकी फार्मर आईडी बनवाने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है ताकि भविष्य में पीएम किसान योजना का लाभ मिलने में कोई रुकावट न आए।" - देवेंद्र कुहाड़, एसडीओ, कृषि विभाग
व्यवस्था और किसानों पर जमीनी प्रभाव
कृषि विभाग के इस कड़े रुख और मैदानी टीमों की लगातार मौजूदगी का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संतुलन पर दिखाई दे रहा है। हालांकि त्योहारी सीजन में छुट्टी रद्द होने से कर्मचारियों में कुछ व्यस्तता जरूर बढ़ी है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और किसानों को सरकारी योजनाओं का निर्बाध लाभ दिलाने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था। क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने भी विभाग की इस पहल का स्वागत किया है, क्योंकि इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूकता तेजी से फैल रही है।




