पानीपत जिले में आम जनता की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं और जनशिकायत निवारण प्रणालियों को धरातल पर अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय वीडियो कांफ्रेंस का आयोजन किया। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने विभिन्न जिलों में सीएम विंडो पर लंबित मामलों की गहनता से पड़ताल की और संबंधित अधिकारियों को बिना किसी विलंब के सख्त व पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए।
वीडियो कांफ्रेंस के तुरंत बाद जिला मुख्यालय पर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ाते हुए उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने स्थानीय अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री विंडो प्रणाली सरकार और आम नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का सबसे सशक्त माध्यम है। इसलिए इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रत्येक अधिकारी का यह दायित्व है कि वह पोर्टल पर आने वाली हर एक शिकायत को केवल एक कागजी औपचारिकता न समझे, बल्कि उसे पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ हल करे ताकि पीड़ित व्यक्ति को अनावश्यक चक्कर न काटने पड़ें।
प्रशासनिक तंत्र और अधिकारियों की समीक्षा बैठक के प्रमुख बिंदु
| समीक्षा पहलू | निर्देशित अधिकारी | प्रशासनिक निर्देश व अनुपालना |
|---|---|---|
| वीडियो कांफ्रेंस समीक्षा | डॉ. सुमिता मिश्रा (एसीएस) | त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश। |
| जिला स्तरीय अनुपालना | डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ (डीसी) | शिकायतों को संवेदनशीलता से लेकर स्थायी राहत देने की हिदायत। |
| पोर्टल कार्यप्रणाली | टीनू पोसवाल (नगराधीश) | केवल जवाब अपलोड करने के बजाय जमीनी स्तर पर वास्तविक समाधान। |
| लंबित मामलों की निगरानी | अंकित चौकसे (एडीसी) | व्यक्तिगत मॉनिटरिंग और तय समयसीमा में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रेषित करना। |
बैठक में आगे की कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए नगराधीश टीनू पोसवाल ने कहा कि सीएम विंडो पर दर्ज होने वाला प्रत्येक प्रार्थना पत्र सीधे तौर पर आम जनमानस के शासन और प्रशासन के प्रति अटूट विश्वास से जुड़ा हुआ है। महज खानापूर्ति करते हुए पोर्टल पर जवाब फीड कर देना ही विभाग की जिम्मेदारी खत्म नहीं करता, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है कि संबंधित शिकायतकर्ता को उसकी समस्या से जमीनी स्तर पर वास्तविक और स्थायी राहत मिली है या नहीं। यदि किसी स्तर पर शिकायतकर्ता असंतुष्ट पाया जाता है, तो संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
"सीएम विंडो सरकार और आम नागरिक के बीच संवाद का मुख्य माध्यम है। प्रत्येक शिकायत को औपचारिकता न समझकर पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ निस्तारित किया जाए। किसी भी मामले में अनावश्यक देरी या लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" - डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त
अधिकारियों की व्यक्तिगत निगरानी और आगामी कार्यप्रणाली
अतिरिक्त जिला उपायुक्त (एडीसी) अंकित चौकसे ने बैठक के दौरान सभी विभागों के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने महकमे से जुड़े लंबित मामलों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार तय की गई समयसीमा के भीतर ही सभी तथ्यात्मक रिपोर्ट उच्च कार्यालयों में जमा कराई जानी चाहिए ताकि जनता की शिकायतों का समय रहते गुणवत्तापूर्ण निपटान हो सके। जिला प्रशासन की इस सख्त कार्यशैली से लापरवाह अधिकारियों में हड़कंप मच गया है और जनहित के मामलों में अब तेजी आने की पूरी उम्मीद है।
इस प्रकार की उच्चस्तरीय बैठकों और प्रशासनिक कसावट का सीधा सकारात्मक प्रभाव स्थानीय स्तर पर देखने को मिल रहा है। पानीपत के नागरिकों को अब उम्मीद है कि उनकी लंबे समय से लंबित पड़ी प्रशासनिक, राजस्व और नागरिक समस्याओं का समाधान अब और अधिक तेजी से हो सकेगा। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल शासन प्रणाली को जनता के प्रति अधिक उत्तरदायी बना रही है, बल्कि सरकारी पोर्टलों पर आमजन का विश्वास भी और अधिक मजबूत कर रही है। आने वाले दिनों में यदि किसी अधिकारी के स्तर पर कार्य में ढिलाई बरती जाती है, तो उस पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।




