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पानीपत पॉक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म में सहायक महिला और मुख्य दोषी को 20-20 साल का कठोर कारावास

पानीपत की पॉक्सो फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मासूम से दुष्कर्म के मामले में महिला और युवक को 20-20 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे समाज के लिए एक गंभीर अपराध माना है।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
2 नवंबर 2026 को 12:46 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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पानीपत पॉक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म में सहायक महिला और मुख्य दोषी को 20-20 साल का कठोर कारावास
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •मई 2024 की घिनौनी वारदात में पानीपत की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला।
  • •मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर घर बुलाने वाली महिला को भी मिली 20 साल की सजा।
  • •अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पीयूष शर्मा ने दोषियों पर लगाया कुल 61 हजार रुपये का जुर्माना।
  • •वारदात के बाद बच्ची को जान से मारने की धमकी देने के मामले में भी कोर्ट ने सुनाई सजा।

पानीपत लाइव (ब्यूरो): पानीपत की न्याय व्यवस्था ने समाज में एक कड़ा संदेश देते हुए नाबालिग बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। पानीपत की पॉक्सो फास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले युवक और इस घिनौने कृत्य में उसका साथ देने वाली महिला को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला न केवल एक बच्ची की गरिमा से जुड़ा था, बल्कि उस भरोसे के कत्ल का भी था, जहां एक पड़ोस की महिला ने ही बच्ची को दरिंदे के हवाले कर दिया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं पॉक्सो फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने 2 नवंबर 2026 को सजा के वारंट जारी करते हुए दोनों दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी समाज के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। दोषियों की पहचान प्रिंस और उसकी सहयोगी महिला के रूप में हुई है, जिन्होंने मई 2024 में इस वारदात को अंजाम दिया था।

घटना का पूरा विवरण और रोंगटे खड़े कर देने वाला घटनाक्रम

मामले की गहराई में जाएं तो यह वारदात मई 2024 की है। पुलिस रिकॉर्ड और अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, दोषी महिला के घर पर प्रिंस नाम का युवक तूड़ी (चारे) का काम करने के लिए आया था। उसी समय गली में एक नाबालिग बच्ची खेल रही थी। प्रिंस की नियत बच्ची को देखकर खराब हो गई और उसने महिला से बच्ची को अंदर बुलाने के लिए कहा। महिला ने पड़ोसी होने का फायदा उठाते हुए बच्ची को बहलाया और अपने घर के अंदर बुला लिया।

जैसे ही बच्ची घर के अंदर दाखिल हुई, आरोपी प्रिंस उसे जबरन कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। इस पूरी घटना के दौरान महिला ने न केवल आरोपी का सहयोग किया, बल्कि बाहर पहरेदारी की। वारदात के बाद मासूम बच्ची को डराया-धमकाया गया कि यदि उसने इस बारे में किसी को भी बताया, तो उसे और उसके परिवार को जान से मार दिया जाएगा। हालांकि, बच्ची के साहस और परिजनों की तत्परता से मामला पुलिस तक पहुंचा और आज न्याय की जीत हुई।

दोषी का नामकानूनी धाराएंसजा का विवरणआर्थिक जुर्माना
प्रिंस (मुख्य दोषी)IPC 376(3), 50620 साल कठोर कैद + 3 साल35,000 रुपये
दोषी महिलाPOCSO 17/4(2), IPC 34220 साल कठोर कैद + 6 माह26,000 रुपये

अदालत की सख्त टिप्पणी और सजा का विस्तृत आधार

न्यायाधीश पीयूष शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि महिला का इस अपराध में शामिल होना और भी अधिक गंभीर है क्योंकि समाज में महिलाओं को बच्चों का संरक्षक माना जाता है। अदालत ने दोषी महिला को पॉक्सो एक्ट की धारा 17 (उकसाने या सहायता करने) के साथ धारा 4(2) के तहत 20 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा, बच्ची को अवैध रूप से बंधक बनाने के लिए आईपीसी की धारा 342 के तहत भी सजा दी गई है।

मुख्य दोषी प्रिंस को आईपीसी की धारा 376(3) के तहत 20 साल की सजा सुनाई गई है। यह धारा विशेष रूप से 16 वर्ष से कम आयु की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामलों में कठोर दंड का प्रावधान करती है। इसके साथ ही, बच्ची को जान से मारने की धमकी देने के लिए धारा 506 के तहत 3 साल की अतिरिक्त सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

"न्यायपालिका का यह निर्णय उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो मासूमों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते हैं। पानीपत पुलिस और अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस केस को मजबूती से लड़ा, जिससे दोषियों को उनके किए की सजा मिली।" - विधिक विशेषज्ञ, पानीपत

स्थानीय जनजीवन और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रभाव

इस फैसले के बाद पानीपत के स्थानीय नागरिकों में कानून के प्रति विश्वास और सुदृढ़ हुआ है। विशेष रूप से शहर के रिहायशी इलाकों में रहने वाले अभिभावकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। पानीपत लाइव की टीम ने जब स्थानीय लोगों से बात की, तो उनका कहना था कि जब पड़ोसी ही भक्षक बन जाएं, तो समाज में डर का माहौल पैदा होता है, लेकिन कोर्ट की ऐसी सख्ती दरिंदों के मन में खौफ पैदा करेगी।

पानीपत पुलिस प्रशासन ने भी इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दाखिल की थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले इस ट्रायल के दौरान पीड़िता के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया गया। दोषियों को दी गई यह सजा पानीपत जिले में महिला एवं बाल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।

आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया गया है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, दोषियों के पास ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प है, लेकिन जिस तरह के पुख्ता सबूत और इकबालिया बयान रिकॉर्ड पर हैं, उसे देखते हुए सजा में राहत मिलना मुश्किल नजर आता है। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और भविष्य में सुरक्षा का आश्वासन भी दिया है।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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